*TODAY'S BHAGWAT GITA SHLOKA*
*DATED 24.03.2026*
*आख्याहि मे को भवानुग्ररूपो नमोऽस्तु ते देववर प्रसीद ।*
*विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यं न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम् ॥11.31॥*
आख्याहि– कृपया बताएँ; मे– मुझको; कः– कौन; भवान्– आप; उग्र-रूपः– भयानक रूप; नमः-अस्तु– नमस्कार हो; ते– आपको; देव-वर– हे देवताओं में श्रेष्ठ; प्रसीद– प्रसन्न हों; विज्ञातुम्– जानने के लिए; इच्छामि– इच्छुक हूँ; भवन्तम्– आपको; आद्यम्– आदि; न– नहीं;हि– निश्चय ही; प्रजानामि– जानता हूँ; तव– आपका; प्रवृत्तिम्– प्रयोजन |
*अनुवाद*
*हे देवेश!कृपा करकेमुझे बतलाइये कि इतने उग्ररूप में आप कौन हैं? मैं आपको नमस्कार करता हूँ, कृपा करके मुझ पर प्रसन्न हों | आप आदि-भगवान् हैं | मैं आपको जानना चाहताहूँ, क्योंकि मैं नहीं जान पा रहा हूँ कि आपका प्रयोजन क्या है |*
*O Lord of lords, so fierce of form, please tell me who You are. I offer my obeisances unto You; please be gracious to me. You are the primal Lord. I want to know about You, for I do not know what Your mission is.*
No comments:
Post a Comment