Tuesday, March 10, 2026

TODAY'S BHAGWAT GITA SHLOKA**DATED 11.03.2026*

*🐌🐌🐌ISKCON🐌🐌🐌*
*TODAY'S BHAGWAT GITA SHLOKA*
*DATED 11.03.2026*

*किरीटिनं गदिनं चक्रिणं च तेजोराशिं सर्वतो दीप्तिमन्तम् ।*
*पश्यामि त्वां दुर्निरीक्ष्यं समन्ता-द्दीप्तानलार्कद्युतिमप्रमेयम् ॥11.17॥*

किरीटिनम् – मुकुट युक्त;गदिनम् – गदा धारण किये; चक्रिणम् – चक्र समेत;च – तथा;तेजःराशिम् – तेज;सर्वतः – चारों ओर;दीप्ति-मन्तम् – प्रकाश युक्त;पश्यामि – देखता हूँ;त्वाम् – आपको;दुर्निरीक्ष्यम् – देखने में कठिन;समन्तात् – सर्वत्र;दीप्त-अनल – प्रज्जवलित अग्नि;अर्क – सूर्य की;द्युतिम् – धूप;अप्रमेयम् – अनन्त |

*अनुवाद*

*आपके रूप को उसके चकाचौंध के कारण देख पाना कठिन है, क्योंकि वह प्रज्जवलित अग्नि कि भाँति अथवा सूर्य के अपार प्रकाश की भाँति चारों ओर फैल रहा है | तो भी मैं इस तेजोमय रूप को सर्वत्र देख रहा हूँ, जो अनेक मुकुटों, गदाओं तथा चक्रों से विभूषित है |*

*Translation*

Your form is difficult to see because of its glaring effulgence, spreading on all sides, like blazing fire or the immeasurable radiance of the sun. Yet I see this glowing form everywhere, adorned with various crowns, clubs and discs.

No comments:

Post a Comment

TODAY'S BHAGWAT GITA SHLOKA**DATED 11.03.2026*

*🐌🐌🐌ISKCON🐌🐌🐌* *TODAY'S BHAGWAT GITA SHLOKA* *DATED 11.03.2026* *किरीटिनं गदिनं चक्रिणं च तेजोराशिं सर्वतो दीप्तिमन्तम् ।* *पश्याम...