*TODAY'S BHAGWAT GITA SHLOKA*
*DATED 17.03.2026*
*रूपं महत्ते बहुवक्त्रनेत्रं महाबाहो बहुबाहूरुपादम् ।*
*बहूदरं बहुदंष्ट्राकरालं दृष्ट्वा लोकाः प्रव्यथितास्तथाहम् ॥11.23॥*
रूपम्– रूप; महत्– विशाल; ते– आपका;बहु– अनेक; वक्त्र– मुख; नेत्रम्– तथा आँखें; महा-बाहों – हे बलिष्ट भुजाओं वाले; बहु– अनेक; बाहु– भुजाएँ; उरु– जाँघें; पादम्– तथा पाँव; बहु-उदरम्– अनेक पेट; बहु-दंष्ट्रा– अनेक दाँत; करालम्– भयानक ; दृष्ट्वा– देखकर; लोकाः– सारे लोक; प्रव्यथिताः– विचलित; तथा– उसी प्रकार; अहम्– मैं |
*अनुवाद*
*हे महाबाहु! आपके इस अनेक मुख, नेत्र, बाहु,जांघ, पाँव, पेट तथा भयानक दाँतों वाले विराट रूप को देखकर देवतागण सहित सभी लोक अत्यन्तविचलित हैं और उन्हीं की तरह मैं भी हूँ |*
*Translation*
*O mighty-armed one, all the planets with their demigods are disturbed at seeing Your great form, with its many faces, eyes, arms, thighs, legs, and bellies and Your many terrible teeth; and as they are disturbed, so am I.*
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