*TODAY'S BHAGWAT GITA SHLOKA*
*DATED 15.03.2026*
*अमी हि त्वां सुरसंघा विशन्ति केचिद्भीताः प्राञ्जलयो गृणन्ति ।*
*स्वस्तीत्युक्त्वा महर्षिसिद्धसंघाः स्तुवन्ति त्वां स्तुतिभिः पुष्कलाभिः ॥11.21॥*
अमी– वे सब; हि– निश्चय ही; त्वाम्– आपको; सुर-सङघाः– देव समूह;विशन्ति– प्रवेश कर रहे हैं; केचित्– उनमें से कुछ; भीताः– भयवश; प्राञ्जलयः–हाथ जोड़े; गृणन्ति– स्तुति कर रहे हैं; स्वस्ति– कल्याण हो; इति– इस प्रकार;महा-ऋषि– महर्षिगण; सिद्ध-सङ्घाः– सिद्ध लोग; स्तुवन्ति– स्तुति कर रहे हैं;त्वाम्– आपकी; स्तुतिभिः– प्रार्थनाओं से; पुष्कलाभिः– वैदिक स्तोत्रों से |
*अनुवाद*
*देवों का सारा समूह आपकी शरण ले रहा है और आपमें प्रवेश कर रहा है |उनमें से कुछ अत्यन्त भयभीत होकर हाथ जोड़े आपकी प्रार्थना कर रहें हैं | महर्षियोंतथा सिद्धों के समूह “कल्याण हो” कहकर वैदिक स्तोत्रों का पाठ करते हुए आपकीस्तुति कर रहे हैं |*
*तात्पर्य*
समस्त लोकों के देवता विश्र्वरूप कीभयानकता तथा प्रदीप्ततेज से इतने भयभीत थे कि वे रक्षा के लिए प्रार्थना करने लगे |
*Translation*
*All the hosts of demigods are surrendering before You and entering into You. Some of them, very much afraid, are offering prayers with folded hands. Hosts of great sages and perfected beings, crying "All peace!" are praying to You by singing the Vedic hymns.*
*Purport*
The demigods in all the planetary systems feared the terrific manifestation of the universal form and its glaring effulgence and so prayed for protection.
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