Thursday, January 29, 2026

TODAY'S SRIMAD BHAGWATAM SHLOKA**DATED 30.01.2026*

*🪼🪼🪼 ISKCON 🪼🪼🪼*
*TODAY'S SRIMAD BHAGWATAM SHLOKA*
*DATED 30.01.2026*

*यो नारदादात्मविद्यामधिगम्य पुनर्महीम् ।*
*भुक्त्वा विभज्य पुत्रेभ्य ऐश्वरं समगात्पदम् ॥ 4.31.27 ॥*

यः — जिसने ; नारदात् — महान ऋषि नारद से ; आत्म - विद्याम् — आध्यात्मिक ज्ञान ; अधिगम्य — सीखने के बाद ;— पुनः ; महिम — पृथ्वी ; भुक्त्वा — भोग करने के बाद ; विभज्य — विभाजित करने के बाद ; पुत्रेभ्यः — अपने पुत्रों में ;ऐश्वरम् — दिव्य ; समागत — प्राप्त किया ; पदम् — पद ।

*अनुवाद*

*यद्यपि महाराजा प्रियव्रत ने महान ऋषि नारद से उपदेश प्राप्त किए थे, फिर भी उन्होंने पृथ्वी पर शासन किया। भौतिक संपदा का पूर्ण आनंद लेने के बाद, उन्होंने अपनी संपत्ति अपने पुत्रों में बाँट दी। इसके बाद उन्होंने ऐसा पद प्राप्त किया जिससे वे अपने घर, भगवान के पास लौट सकें।*

*Translation*

*Although Mahārāja Priyavrata received instructions from the great sage Nārada, he still engaged in ruling the earth. After fully enjoying material possessions, he divided his property among his sons. He then attained a position by which he could return home, back to Godhead.*

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